भारत में निर्यात व्यापार कैसे शुरू करे ? - How to start export business in India?
How to start export business in India?
आज हम जानते है कि भारत में निर्यात व्यापार कैसे शुरू करे ? - How to start export business in India? इस व्यापार को करने के लिए आपको कितनी लागत लगती है, कंपनी कैसे बनाते है. इसमें आपको कितना मुनाफा या कमाई कर सकते है. सारी जानकारी के लिए आप हमारे इस पोस्ट को पूरा पढ़े.
“निर्यात” (Export) का अर्थ- एक देश से, दुसरे देश में सामान भेजना. “आयात” (Import) का अर्थ- किसी दुसरे से देश से सामान अपने देश में लाना, अतः दो देशो के बीच होने वाले सामान का आदान-प्रदान या बेचना - खरीदना, अंतराष्ट्रीय व्यापार कहलाता है. भारत में विदेश व्यापार निदेशालय (DGFT), विदेशी व्यापारों की निगरानी और सुविधा देता है.
आज हम निर्यात व्यापार में सिर्फ स्टोन प्रोडक्ट की बात करेंगे. जिसमे मार्बल, ग्रेनाइट, स्टोन और टाइल्स को कैसे निर्यात किया जाता है. सबसे पहले आपको अपने व्यापार का विश्लेषण करना होगा, कॉस्ट-लागत और माल के बारे में गहनता से जानकारी जुटानी होगी. उसके बाद एक्सपोर्ट करने के लिए कंपनी बनानी होगी और उसका रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.
एक्सपोर्ट कम्पनी का रजिस्ट्रेशन कैसे करे - How to register export company
विदेशों में सामान एक्सपोर्ट करने के लिए भारत सरकार एक्सपोर्ट करने का लाइसेंस देती है, उसके लिए निम्न डॉक्यूमेंट और शर्तें का होना आवश्यक होती है
- कंपनी का बैंक अकाउंट और पैन नंबर होना चाहिए.
- इंपोर्टर-एक्सपोर्टर कोड (IEC) नंबर होना चाहिए.
- रजिस्ट्रेशन कम मेंबरशिप सर्टिफिकेट (RCMC).
- GST नंबर होने चाहिए.
कंपनी रजिस्ट्रेशन करने के लिए सारे डॉक्यूमेंट को ऑनलाइन आवेदन करके प्राप्त किए जा सकते है.
सबसे पहले कंपनी के नाम का पंजीकरण करना आवश्यक है उसके लिए २० दिन का समय लग सकता है किसी भी भरोसेमंद बैंक में कंम्पनी का एक currant account खुला होना चाहिए. बैंक आपको अंतराष्ट्रीय स्तर पर लेन- देन करने के लिए एक अकाउंट नंबर और स्विफ्ट कोड जारी करती है पैन कार्ड के लिए इस लिंक पर जाकर आवेदन करके पैन कार्ड प्राप्त किया जा सकता है NSDL से पैन कार्ड बनवाए
Import export code (IEC) के लिए आवेदन कैसे करे | How to apply for Import Export Code (IEC).
Import export code (IEC ) 10 डिजिट की एक unique कोड होते है जिससे उस कंपनी की पहचान होती है IEC कोड विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी किया जाता है | विदेश व्यापार महानिदेशालय भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है | भारत सरकार के तय नियमों के आधार पर दस्तावेज जमा करने पर उद्यमी को IEC कोड जारी किये जाते है बिना IEC के बिना आप किसी भी सामान का निर्यात नही कर सकते है IEC कोड के लिए DGFT की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करके प्राप्त किया जा सकता है जिसका लिंक नीचे दिया गया है
IEC के लिए आवेदन करने के लिए यहाँ क्लिक करे.
- IEC कोड के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए लिंक्स सेक्शन में से DGFT की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना है |
- वेबसाइट पर जाने के बाद आपके सामने एक होम पेज ओपन हो जाएगा |
- जहा पर आपको Apply for IEC Card पर क्लिक करना होगा है |
- आवेदन के लिए मुख्य दस्तावेज़ :- आधार कार्ड, बिजली का बिल, लीज डीड, MOU पार्टनरशिप डीड, टेलीफोन बिल, मोबाइल पोस्टपेड बिल,एक कैंसिल चेक आदि की जरुरत होती है.
- Export बिज़नस के लिए GST लेना बहुत जरुरी है. GST नंबर लेने के लिए भारत सरकार की अधिकारिक वेबसाइट Goods and Services Tax पर जा कर आवेदन करके प्राप्त किया जा सकता है
- Export कंपनी का पंजिकरण और सारे जरुरी दस्तावेज प्राप्त होने के बाद आप अपनी कंपनी से मटेरियल को निर्यात कर सकते है.
हम इस पोस्ट में मार्बल, ग्रेनाइट, स्टोन और टाइल्स को कैसे export करते है उसके बारे में जानेंगे. आप दो तरह से मटेरियल का export Business in India में कर सकते है.
1. फैक्ट्री लगा करके व्यापार करना
आप अपनी खुद की फैक्ट्री या दुकान लगा सकते है. खदान से मटेरियल निकाल करके उसको कटाई, घिसाई और साइज़ में काटता है यह कार्य एक फैक्ट्री में वर्कर से तेयार किया जाता है बाद में उसको सीधा विदेश में बेचा जाता है अगर आपको फैक्ट्री का काम अच्छे से आता है तो आप इस बिज़नस को बहुत ही आसानी से कर सकते है. इस बिज़नस को मशीन तथा मटेरियल में उपयोग होने वाले सामान को खरीदने की आवश्यकता होती है. इसके लिए आपको इसमें बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेंट की आवश्यकता होती है.
2. एक्सपोर्टर कम्पनी बना करके व्यापार करना
एक्सपोर्टर कम्पनी सीधा फेक्टरी से मटेरियल खरीद करके उसको निर्यात करती है एक्सपोर्टर सिर्फ अपना ऑफिस लगा करके पुरे भारत में कही से भी मार्बल, ग्रेनाइट, स्टोन और टाइल्स को खरीद करके विदेश में बेच सकता है एक्सपोर्टर कंपनी को बहुत कम लागत में शुरू किया जा सकता है आप इस बिज़नस को करके महीने के लाखो रुपये कमा सकते है क्योंकि हर घर को बनाने के लिए मार्बल, ग्रेनाइट, स्टोन और टाइल्स का इस्तेमाल होता ही है. तथा एक्सपोर्टर कम्पनी में ज्यादा इन्वेस्मेंट करने की आवश्यकता नही होती है.
निर्यात व्यापार को शुरू करने से पहले मटेरियल का मूल्य निर्धारित करना बहुत आवश्यक है क्योंकि ग्राहक को किस दर पर मटेरियल को बेचा जाये, उसको बनाने में कितना खर्च आया, मटेरियल को बेचने के बाद कितना लाभ मिलना चाहिए. ये सारे मानक पहले की निर्धारित किये जाने चाहिए. उसके बाद अपने मटेरियल को बेचना या निर्यात करना चाहिए.
स्टोन मटेरियल कितने प्रकार के होते है | What are the types of stone material
अगर हम मटेरियल की बात करे तो संगमरमर, ग्रेनाइट, टाइल्स, बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, क्वार्ट्ज पत्थर, क्वार्टजाइट, स्लेट पत्थर, कोबल्स और पैनलों आदि आते है.
1. संगमरमर (Marble) :-
संगमरमर एक रूपांतरित चट्टान है जो पुनर्रचित कार्बोनेट खनिजों से बना है, जो आमतौर पर कैल्साइट या डोलोमाइट है मार्बल का उपयोग सबसे ज्यादा फर्श, मंदिर, स्तम्भ बनाने के लिए किया जाता है मकराना, जोधपुर (राजस्थान) का वाइट मार्बल विश्व भर में प्रसिद्ध है. साथ ही मार्बल के बहुत से प्रकार होते है जैसे- ग्रीन मार्बल, वाइट मार्बल, ब्लैक मार्बल आदि.
2. ग्रेनाइट (Granite)
ग्रेनाइट एक मोटे दाने वाली (फैनेरिटिक) वाली आग्नेय चट्टान है जो ज्यादातर क्वार्ट्ज, क्षार फेल्डस्पार और प्लाजियोक्लेज़ से बनी होती है। ग्रेनाइट बहुत ही मजबूत और चमकदार होता है जालोर जिला (राजस्थान) ग्रेनाइट के लिए बहुत प्रसिद्ध है. ग्रेनाइट के भी बहुत सारे प्रकार होते है जैसे – ब्लैक, वाइट, रेड आदि.
3. पत्थर (Stone)
पत्थर मुख्य रूप से रेत के आकार (0.0625 से 2 मिमी) सिलिकेट से बना एक क्लैस्टिक तलछटी चट्टान है। बलुआ पत्थर सभी तलछटी चट्टानों का लगभग 20-25% है। स्टोन लगभग हर जगह पाया जाता है इसके निम्न प्रकार है जैसे - चूना पत्थर(Lime Stone), क्वार्ट्ज रेत (QuartzSand), क्वार्टजाइट(Quartzite), स्लेट पत्थर (Slate stone), कोबल्स (Cobbles) आदि.
4. टाइल्स (Tiles)
टाइल कठोर और मजबूत सामग्री जैसे सिरेमिक, पत्थर, धातु, पकी हुई मिट्टी या कांच से निर्मित टुकड़ा है, जिसका उपयोग आमतौर पर छतों, फर्श, दीवारों या अन्य वस्तुओं पर लगाने के लिए किया जाता है। टाइल्स बनाने की सबसे बड़ी इंडस्ट्रियल एरिया या फैक्ट्री, मोरबी (गुजरात) में है जहा से पूरी दुनिया में व्यापार होता है.
स्टोन पर कौन - कौन सी पोलिश की जाती है | Which polish is done on stone
अभी तक आपने मटेरियल के प्रकार के बारे में पढ़ा. आये अब हम सभी फिनिशिंग के बारे में जानते है कि मटेरियल के उपर की सतह को चमकाने के लिए किस-किस तरह की फिनिशिंग का प्रयोग किया जाता है. मटेरियल पर निम्न प्रकार की फिनिश होती है जैसे - Polish, Antique, Sand Blasted, River Wased, Natural Calibrate, Tumbled आदि.
- एंटीक फिनिश - पत्थर की सतह को ख़राब करने के लिए, पत्थर की सतह पर एसिड वाश लगाया जाता है। यह आमतौर पर पत्थर के रंग को फीका कर देता है। पत्थर को चिकना बनाने और रंग को थोड़ा बहाल करने के लिए किया जाता है सतह को यांत्रिक तार झाड़ी से ब्रश किया जाता है
- सैंडब्लास्टिंग फिनिश - एक सतह परिष्करण प्रक्रिया है जिसमें एक संचालित मशीन का उपयोग शामिल होता है आमतौर पर एक एयर कंप्रेसर के साथ-साथ एक सैंडब्लास्टिंग मशीन से सतह के खिलाफ उच्च दबाव में अपघर्षक कणों को स्प्रे किया जाता है । इसे अपघर्षक ब्लास्टिंग के रूप में भी जाना जाता है।
- रिवर वॉश फिनिश - यह सबसे अनोखे फिनिश में से एक है, यह ब्रश करने की तुलना में गहरा और प्राकृतिक पत्थर की विशेषताओं द्वारा परिभाषित अद्वितीय घाटियों और घाटियों को बनाने के लिए किया जाता है या प्रकिया बहुत धीमी गति से की जाती है।
- डीप रिवर फिनिश - ग्रे मार्बल दूसरों से थोड़ा अलग होता है । उसके लिए डीप रिवर फिनिश से धूसर सतह पर पैटर्न का रूप दिया जाता हैं जो एक बादल आकाश जैसा दिखता है।
मार्बल और ग्रेनाइट फैक्ट्री में कैसे काम होता है | How does the marble and granite factory work
फैक्ट्री में बड़े संगमरमर के ब्लाक को छोटे-छोटे आकार के स्लैब में काटा जाता है और एक बेहतर फिनिश देने के लिए परिष्कृत उपकरणों के साथ पॉलिश किया जाता है। अधिकतम चमक प्राप्त करने के लिए उच्च प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा पॉलिश किया जाता है। उच्च उत्पादन क्षमता के साथ-साथ भारत में मार्बल, ग्रेनाइट, स्टोन और टाइल्स का सबसे बड़ा कारखाना है। आयात और कारखाने के बीच उचित समन्वय एक नियोजित उत्पादन प्रणाली को सक्षम बनाता है। प्रभावी परिवहन के लिए लोडिंग ट्रक और क्रेन को स्टैंडबाय पर रखा गया है।
मार्बल और ग्रेनाइट स्लैब की कटाई कैसे की जाती है | How to cut marble and granite slabs
जिस प्रकार से ग्राहक को आवश्यकता या वो जो आर्डर करता करता है उस प्रकार से मार्बल, ग्रेनाइट, स्टोन सभी को एक निशित साइज़ पर कटा जाता है कटिंग के लिए मशीन का उपयोग किया जाता है. निम्न प्रकार की कटाई की जाती है जैसे - Hand Cut, Machine Cut, Natural, Sawn, Honed, Flamed.
कटिंग के लिए निम्न प्रकार की मशीनो का उपयोग किया जाता है.
- गैंग आरी (Gang saw) - गैंग आरी का उपयोग ग्रेनाइट और मार्बल जैसे पत्थर के ब्लॉक को काटने या अन्य कठोर पत्थर को काटने के लिए किया जाता है, जिसमें आरा खत्म होने की सम्भावना नहीं होती है।
- राल लाइन (Resin Line) - राल लाइन का उपयोग पत्थरों की गुणवत्ता, स्थायित्व में सुधार को भरने और एपॉक्सी फ़ंक्शन के लिए किया जाता है।
- स्लैब पॉलिशिंग (Slab Polishing) - यह मशीन ग्रेनाइट संगमरमर और पत्थरों के स्लैब को चमकाने के लिए उपयुक्त है। इसमें ऑटो डोडिंग फंक्शन, शेप मेमोरी फंक्शन और अपघर्षक खपत उपकरण होता हैं जिससे उच्च स्वचालन संचालन और कम श्रम शक्ति लगा करके काम किया जाता है।
- ब्रिज सॉ (Bridge Saw) - पेशेवर और गुणवत्ता में कटौती सुनिश्चित करने के लिए यह एक पुल या बीम पर चलता है। ब्रिज आरी का उपयोग ग्रेनाइट, चीनी मिट्टी की चीज़ें, संगमरमर, पत्थरों और स्लैब को काटने के लिए किया जाता है।
- उत्खनन मशीन (Quarrying Machine) - हाइड्रोलिक क्रॉलर ट्रैक पर सेट तार उत्खनन मशीन का उपयोग, खदान के फर्श, चौकों पर छोटे ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज और झुके हुए कट या ब्लॉक स्क्वेरिंग काटने के लिए उपयुक्त है।
अभी तक आपने मटेरियल के प्रकार, फिनिशिंग, कटाई और मशीन के बारे में पढ़ा. चलिए अब आगे हम कुछ एसे फैक्ट के बारे में पढ़ते है जो आपके export business को बढ़ाने के लिए बहुत जरुरी है. जैसे ग्राहक या डीलर से आर्डर प्राप्त करना, फैक्ट्री में मटेरियल पैकिंग करना, लोडिंग करना, कौनसे-कौनसे डॉक्यूमेंट को बनाने की आवश्यकता होती है.
एक एक्सपोर्टर कंपनी सबसे पहले विदेश में supply करने वाली या विदेशी गाहक कंपनिया होती है, उनसे माल का आर्डर लेती है और अपने देश में manufacturer या फैक्ट्री को आर्डर देती है कि उनको इस प्रकार का मटेरियल चाहिए. उस आर्डर के अनुसार ही फैक्ट्री में मटेरियल तैयार किया जाता है, मटेरियल के तैयार होने के बाद उसको ट्रांसपोर्ट करने का काम होता है
कस्टम हाउस एजेंट (CHA) कौन होता है | Who is a Custom House Agent (CHA)
एक कस्टम हाउस एजेंट (CHA) कस्टम स्टेशन पर माल के आयात और निर्यात से संबंधित व्यावसायिक लेनदेन की निगरानी के लिए जिम्मेदार होता है। एजेंट किसी भी शिपमेंट के प्रवेश या प्रस्थान के विभिन्न चरणों की देखभाल करते हैं CHA के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारी इस पोस्ट पर क्लिक करे -
शिपिंग लाइन क्या होती है | What is a shipping line
शिपिंग लाइन एक देश या बंदरगाह से दूसरे देश या बंदरगाह पर माल की पहुचाने का कार्य करती है, कंटेनर, जहाज और माल आदि को शिपिंग या लॉजिस्टिक्स कंपनी द्वारा नियंत्रित किया जाता। शिपिंग लाइन के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारी इस पोस्ट पर क्लिक करे.
कंटेनर बुकिंग कैसे करते है | How to do container booking
जब मटेरियल तैैयार होने के बाद उसको भर कर पोर्ट (बंदरगाह) तक पहुचने लिए कंटेनर या ट्रक की आवश्यकता होती है हम माल को दो प्रकार से भरके बंदरगाह तक पंहुचा सकते है पहला पैकिंग बक्सों को सीधे ट्रक में लोड करके भेजना. दूसरा कंटेनर बुकिंग करके मंगवाना. कंटेनर एक 10 फीट, 20 फीट या 40 फीट की साइज़ में लोहे का बॉक्स होता है जिसके अंदर माल लोड किया जाता है कंटेनर को एक्सपोर्टर खुद बुक कर सकता है या वो CHA (Custom Clearance Agent) के दुवरा बुक करवा सकते है. एक्सपोर्टर, परिवहन के लिए बंदरगाह का विकल्प को चुनता है। उदाहरण के लिए लोडिंग पोर्ट जैसे मुंद्रा, कट्टुपल्ली, विशाखापत्तनम, चेन्नई बंदरगाह आदि अनेक पोर्ट है उसके बाद अपना माल किस देश में भेजना है उस देश का पोर्ट तय किया जाता है जैसे Valencia (Spain), Alumar (Brazil), Bayone (France), Alexandra (UK) आदि बंदरगाह को चुना जा सकता है
मटेरियल पैकिंग कैसे करते है | How to do material packing
पैकेजिंग प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। पत्थरों को छिलने, खरोंचने या किसी अन्य प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए मजबूत लकड़ी के टोकरे (Crates) में पत्थरों को पैक किया जाता है पैकिंग करते समय हमें सभी आवश्यक कदमों का पालन करना चाहिए। लंबे स्लैब या बड़े आकर के पत्थर को सीधा कंटेनर में लोड करके लकड़ी से पैक किया जाता है छोटे स्लैब या ब्लॉक के लिए लकड़ी के कैरेट बना करके पैक किये जाते है। पत्थरों को नुकसान से बचाने के लिए फोम शीट या फार्माकोलशीट से पैक किया जाता है। पॉलिश की गई सतहों को खरोंच से बचाने के लिए हमेशा पतली पॉलिथीन शीट डालते हैं। मजबूती बढ़ाने के लिए प्रत्येक टोकरे के चारों ओर लोहे/प्लास्टिक की पट्टी लगाते हैं।
कंटेनर में माल लोड कैसे करते है | How to load goods in container
जब ट्रक या कंटेनर बुकिंग होने के बाद उसको लोडिंग के लिए बुलाया जाता है. सबसे पहले निरीक्षक कंटेनर का निरीक्षण करता है। कि कंटेनर अच्छी स्थिति में है या नही, सामान सही पैक हुआ या नही, ग्राहक के सभी निर्देशों का पालन हुआ या नही । कंटेनर की लोडिंग शुरू होने के बाद निरीक्षक सत्यापित करता है जैसे - सही यूनिट राशि की लोडिंग, मौसम की स्थिति, कंटेनर के आने का समय, कंटेनर नंबर और ट्रक नंबर रिकॉर्ड करता है। उसके बाद क्षति, स्वास्थ्य, वेध, गंध और निशान आदि का आकलन करने के लिए प्रत्येक कंटेनर की आंतरिक और बाहरी स्थिति की जांच करता है । पैकिंग मटेरियल को मजदूर या आधुनिक मशीनो से कंटेनर में लोड किया जाता है. लकड़ी के बक्से को दीमक या नमी से ख़राब होने से बचाने के लिए रासायनिक उपचार किया जाता है जिसे Fumigation प्रोसेस कहा जाता है सारी स्थिति सही पाए जाने के बाद अंत में कंटेनर को कस्टम की सील और शिपिंग लाइन की सील से सील किया जाता है । साथ ही कंटेनर की सील संख्या और प्रस्थान का समय दर्ज किया जाता है।
कंटेनर को कैसे सील किया जाता है | How is the container sealed
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने विभाग के एक अधिकारी की निगरानी में कंटेनरों फैक्ट्री स्टफिंग को समाप्त कर दिया है अब पात्र एक्सपोर्टर इलेक्ट्रॉनिक सील का उपयोग करके, अपने निर्यात कंटेनरों को स्वयं सील करने के हकदार हैं। सीलिंग दो प्रकार की होती है, सेल्फ-सीलिंग और पोर्ट सीलिंग।
- सेल्फ सीलिंग करना :- निर्यातक अपने कारखाने के परिसर में पर्यवेक्षित फैक्ट्री स्टफिंग की प्रणाली के तहत वे स्वतः ही सेल्फ-सीलिंग प्रक्रिया से कंटेनर को सील कर सकते है । निर्यातक को अनुमोदित परिसर में सेल्फ-सीलिंग के लिए सीमा शुल्क अधिकारी से अनुमति लेनी होती है। एक बार अनुमति मिलने के बाद निर्यातक हर बार अनुमोदित परिसर में सेल्फ-सीलिंग के दौरान सीमा शुल्क को सूचित करता है। सीमा शुल्क अधिकारी ई-सील का सत्यापन करते हैं। यदि ई-सील को 'नॉट टैम्पर्ड' के रूप में पढ़ा गया है, तो निर्यात खेप को पंजीकरण के उद्देश्य से संसाधित किया जाएगा और प्रक्रियाओं के अनुसार 'एलईटी एक्सपोर्ट ऑर्डर' प्रदान किया जाएगा। सीमा शुल्क निकासी की सूचना निर्यातक की पंजीकृत ईमेल आईडी पर भेजी जाती है। आम तौर पर कंटेनर में RFID सील और लाइन सील का इस्तेमाल किया जाता है RIFD सील को आईएसओ कोड की पुष्टि करनी होती है
- पोर्ट सीलिंग करना :- जब माल ट्रक में लोड करके सीधा बंदरगाह पर भेजा जाता है तो उस माल को पोर्ट पर बुक किये गए कंटेनर में लोड किया जाता है यह कार्य पोर्ट CHA करता है वो पार्ट पर होने वाली सारी प्रोसेस का जिम्मेदार होता है पोर्ट पर मोजूद कस्टम के अधिकारी से कंटेनर का निरक्षण किया जाता है सारी जानकारी सही पाए जाने बाद ही कंटेनर को सील किया जाता है.
कंटेनर में Fumigation कैसे किया जाता है | How is Fumigation done in a container
धूमन एक प्रकार का कीट नियंत्रण है जिसके द्वारा कीटाणुशोधन प्रक्रिया शुष्क तरीके से होती है। इस विधि को फाइटोसैनिटरी उपचार के रूप में भी जाना जाता है. आजकल व्यापक रूप से विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग की जाती है (विशेषकर जब कंटेनरों के माध्यम से माल परिवहन की बात आती है )। इसके कीट नियंत्रण उद्देश्य के अलावा, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों द्वारा कंटेनर धूमन प्रक्रिया की भी आवश्यकता होती है जो माल के पारगमन को नियंत्रित करते हैं। इसलिए यह प्रक्रिया फ्रेट फारवर्डरों के लिए कंटेनर को भेजने से पहले करना आवश्यक है.
अभी तक आपने माल को पैक करना, लोड करना, सील करना आदि के बारे में पढ़ा. अब आगे उन सभी आवश्यक दस्तावेज के बारे में पढेंगे, जो बंदरगाह पर कस्टम विभाग में जरुरी है जैसे – Purchase Invoice, Packing list, e-Way bill, Insurance, Annuxure form, Weightment Slip आदि,
खरीद चालान क्या होती है | What is a Purchase invoice
यह एक दस्तावेज है जो माल और सेवाओं के खरीदार द्वारा जारी किया जाता है, यह पुष्टि करता है कि आदेश वास्तव में विक्रेता के द्वारा पूरा किया गया है। यह चालान खरीद आदेश के बाद बनाया जाता है जो क्रेता द्वारा विक्रेता को जारी किया जाता है। खरीद चालान पर देय तिथि वह तिथि है जिसके द्वारा खरीदार विक्रेता को सामान और सेवाओं के लिए भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध होता है।
ई-वे बिल क्या होता है | What is a e-Way bill
एक ई-वे बिल एक दस्तावेज है जिसे परिवहन के प्रभारी व्यक्ति द्वारा 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के माल की किसी भी खेप को ले जाने के लिए आवश्यक है जैसा कि सरकार द्वारा अनिवार्य है। निर्यात के लिए माल को बंदरगाह पर ले जाने पर ई-वे बिल जनरेट किया जाना चाहिए। ई-वे बिल वैधता गोदाम/व्यवसाय के स्थान से बंदरगाह तक की होती है । ई-वे बिल की अधिक जानकारी के लिए हमारी इस पोस्ट पर क्लिक करे.
माल का बीमा कैसे किया जाता है | How is goods insured
सभी निर्यात किये जाने वाले मटेरियल का बीमा करवाना बहुत आवश्यक होता है क्योकि फैक्ट्री से बंदरगाह तक परिवहन के दौरान माल क्षतिग्रस्त होने पर निर्यातक को वित्तीय नुकसान हो सकता है। नुकसान से बचाने के लिए निर्यातक को माल की भौतिक क्षति से बचाने के लिए बीमा पॉलिसी लेनी पड़ सकती है। इसे कार्गो बीमा' कहते है। जब माल समुद्र में जहाज के द्वारा भेजा जाता है, उसे समुद्री बीमा के रूप में जाना जाता है। कार्गो बीमा शब्द का उपयोग हवाई शिपमेंट के मामले में किया जाता है। हालाँकि व्यवहार में दोनों शब्दों का परस्पर उपयोग किया जाता है और उनके नियम सामान्य हैं। बीमा की आवश्यकता मुख्यतः दो कारणों से होती है, कानूनी और वाणिज्यिक। बिचौलियों का कानूनी दायित्व सीमित है। बिचौलियों में समाशोधन, अग्रेषण एजेंट, वाहक बंदरगाह और सीमा शुल्क प्राधिकरण आदि शामिल हैं जो विभिन्न चरणों में माल को संभालते हैं। यदि क्षति उनके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हुई है या यदि उनके द्वारा उचित देखभाल के बावजूद नुकसान हुआ है, तो वे कोई दायित्व नहीं लेते हैं। इस प्रकार माल को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए बीमा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बीमा करने के लिए आप किसी भी अच्छे बीमा कंपनी से पालिसी लेकर अपने हर कंटेनर के लिए बीमा करवा सकते है. जैसे - Life Insurance Corporation of India, The Oriental Insurance Company Limited Bajaj Allianz Life Insurance Co. Ltd., Bharti AXA Life Insurance Co. Ltd., आदि बेस्ट बीमा कंपनी है.
अन्य दस्तावेज :- बिल ऑफ़ लडिंग, शिपिंग बिल, सी - वे बिल, सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन आदि को बनाना भी बहुत जरुरी होता है. बिल ऑफ़ लडिंग, सी - वे बिल और शिपिंग बिल के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारी इस पोस्ट पर क्लिक करे -
जब आपका माल विदेश में अपने ग्राहक तक पहुच जाता है तो उसके बाद वो आपके बिल के अनुसार विदेशी मुद्रा में भुगतान करेगा, उसके लिए बैंकिंग प्रोसेस को समझना बहुत जरुरी है
निर्यात के लिए बैंक में क्या-क्या कार्य होते है | What are the functions of a bank for export
बैंक पहले निर्यातक द्वारा जमा किए गए सभी दस्तावेजों की जांच करेगा। यदि बैंक सभी दस्तावेजों को क्रम में पाता है, तो वह आयातक के बैंक के साथ दस्तावेजों की बातचीत की प्रक्रिया शुरू करता है। यह प्रक्रिया आयातक के एलसी के नियमों और शर्तों के अनुसार संचालित की जाएगी। निर्यातक के लिए अगला कदम उस बैंक को संबंधित दस्तावेज जमा करना है जहां उनका खाता है। यह प्रक्रिया आयातक के बैंक खाते से भुगतान प्राप्त करने के लिए शुरू की गई है। भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक को प्रस्तुत किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों को अक्सर दस्तावेजों के परक्राम्य सेट के रूप में संदर्भित किया जाता है। दस्तावेजों के परक्राम्य सेट को प्राप्त करने के बाद निर्यातक के बैंक द्वारा आयातक के बैंक के साथ शुरू की गई प्रक्रिया को आमतौर पर 'दस्तावेजों की बातचीत' कहा जाता है। भुगतान वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों को निर्यातक के बैंक में जमा करने की आवश्यकता होती है:
- Commercial Invoice (वाणिज्यिक चालान).
- Export Packing List (निर्यात पैकिंग सूची).
- Bill of Lading (लदान बिल).
- Purchase Invoice (खरीद चालान).
- Certificate of Origin (उदगम प्रमाण पत्र).
- Inspection Certificate (निरीक्षण प्रमाणपत्र).
- Destination Statement (गंतव्य विवरण).
- Insurance Certificate (बीमा प्रमाणन पत्र).
निर्यात की आय की प्राप्ति करने के लिए निर्यातक को विशिष्ट बैंकिंग औपचारिकताओं से गुजरना होगा। विनिमय बिल जमा करने पर, ये औपचारिकताएँ शुरू की जाती हैं। आम तौर पर निर्यातक को विदेशी मुद्रा में भुगतान प्राप्त होता है। भारतीय निर्यातक पुष्टि करता है कि उसके पास सभी आवश्यक शिपिंग दस्तावेज हैं, जैसे समुद्री बीमा पॉलिसी, कांसुलर चालान, उत्पत्ति का प्रमाण पत्र, वाणिज्यिक चालान, लदान का बिल तब निर्यातक के आधार पर विनिमय का बिल तैयार करता है इन दस्तावेजों के साथ बिल ऑफ एक्सचेंज को डॉक्यूमेंट्री बिल ऑफ एक्सचेंज कहा जाता है। फिर निर्यातक उसे अपने बैंक को सौंप देता है। बैंक आपके दस्तावेज की जाँच करने के बाद आपके प्राप्त हुए विदेश मुद्रा को आपके खाते में जमा कर देगा. आप अपना पेमेंट इंडियन रुपया या विदेशी मुद्रा किसी में भी अपनी कंपनी के खाते में ले सकते है, बाद में उनको मुद्रा Conversion करके, अपने खरीददार को भुगतान कर सकते है
बैंक आपके बिल का भुगतान करने के बाद आपके बिल को बंद करने की सारी प्रकिया करता है अंत में e-BRC (Bank Realisation Certificate ) जारी करता है e-BRC क्या होती है कौन जारी करता है जानने के लिए हमारी इस पोस्ट पर क्लिक करे.
आज आपने जाना की निर्यात व्यापार कैसे करते है, अगर आपको इस पोस्ट से जुड़े कोई भी प्रश्न पूछना चाहते है तो हमे नीचे कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकते है.
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